Thursday, 23 April 2020

आजकल आपने कही ये शब्‍द जरूर सुना होगा कि मैं समय हुं उसकी इस आवाज मे इतनी खनक क्यो होती है जानते है क्‍योंकिे वह जानता है कि उसका आप कुछ नही बिगाड सकते लेकिन यदि आप उसका अनादर करते रहेंगे तो वह आपका आप से सबकुछ छीन सकता है। इसलिए समय की कीमत को पहचान कर आप अपने सामर्थ्‍य को बनाये जिससे कि आपकी पहचान समाज मे बहुत अच्‍छी हो सके । वर्तमान समय मे समाज को सामर्थ्‍यावान व समझदार लोगो कि बहुत जरूरत है। समय के साथ आपने सामर्थय को पहचानियेे और राष्‍ट्र केा मजबुत किजिए ये हमारा और आपका प्रथम दायित्‍व है जय हिंद जय भारत।।


******************************************************
समय और सामर्थ्य का सामंजस्य....
रोजमर्रा की जीवन और जीने के औचित्य
बनाता हूॅं
मैं समय और सामर्थ्य का सामंजस्य....
हर कदम जीत के लिए हम,
साधनों के लिए साध्य का अहम्।
हर पल हल क्षण के लिए,
लक्ष्य की कसम लगाये जब हर दम।
मैं मेहनत और साहस का भृत्य।
बनाता हूॅं
मैं समय और सामर्थ्य का सामंजस्य....
लक्ष्य सोच विश्‍वास कि पंचाट,
हर बात, हर अवरोध के काट,
लक्ष्य के लिए जीवन हर क्षण,
लक्ष्य कें लिए बना मैं विराट।
मेरे द्वारा किए गए अद्वितीय कृत्य।
बनाता हूॅं
मैं समय और सामर्थ्य का सामंजस्य....
चलने के तरीके खोज, राह निर्माता।
दान धर्मरक्षी, सबसे बड़ा दाता।
हर कदम पर छाप छोडते हुए,
बनूॅ मैं कर्मशील जगपोषित विधाता।
करू सोच बनूॅ बुलंद नित्य।
बनाता हूॅं
मैं समय और सामर्थ्य का सामंजस्य....
रोग रोगी हर दवाई तक,
ज्ञान ज्ञानी की हर पढ़ाई तक।
मर्मज्ञता मीमांसा को सम्माहित किए हुए,
सूक्ष्म और सूक्ष्मता के हर गहराई तक।
करू हर अंधेरा हर शाम से आदित्य।
बनाता हूॅं
मैं समय और सामर्थ्य का सामंजस्य....

6 comments:

  1. लक्ष्य और समय का सूक्ष्मता से आपस मे जो संबंध स्थापित किया गया है, सराहनीय है।

    ReplyDelete
  2. मैं समय और सामर्थ्य का परिणाम कहलाता हूँ ..
    प्राणवान सर दिल छू गया

    ReplyDelete

Please Do Not Enter any Spam Link In the Comment Box.