Monday, 27 April 2020

मेहनती कभी बदनसीब नहीं होते

हम नसीब को हमेशा कोसते रहते हैं हमें ऐसा नहीं करना चाहिए हमें अपने नसीब पर और खुद पर गर्व होना चाहिए कि ईश्वर ने हमें सब से बेहतर इंसान बनाया और पाबंदी के साथ दो वक्त की इज्जत से रोटी दी और हमें क्या चाहिए क्यों हम रात दिन रोते रहते हैं कि हमें ईश्वर ने गरीब क्यों बनाया हमें इस बात का फक्र होना चाहिए कि हमारे ईश्वर ने तो हाथ पैर दिए हैं जिससे हम मेहनत करके अपना परिवार का लालन पालन कर सकते हैं तो हम गरीब किस बात के अमीर भी गेहूं का आटा खाते हैं और गरीब भी अमीर भी पानी पीते हैं और अमीर भी सोता है हम भी सोते हैं तो हम मैं और अमीर में किस बात का फर्क जब ईश्वर ने अमीर और गरीब को इस धरती पर भेजा है कोई भी इंसान अपने को बदनसीब ना समझे जो हर इंसान खूब मेहनत करेगा तो गरीबी एक दिन खुद भाग जाएगी जो इंसान इज्जत के साथ अपने परिवार को दो वक्त रोटी खिला सकता हैतो वह गरीब नहीं बस उस ईश्वर से अपनी और अपने बच्चों की तंदुरुस्ती मांगे और सलामती मांगे खूब मेहनत करेंगे तो वह दिन दूर नहीं जब वह खुद अमीरी हमारे पास चलकर आएगी कोई भी इंसान गरीब हो पर बदनसीब ना हो नसीब से ई ' की तस्वीर बदल देता है अपने आप को किसी से कमजोर ना समझो और अपने से किसी को गिरा मत समझो तो सफलता 1 दिन कदम चूमेगी





मेहनती कभी बदनसीब नहीं होते,

असफल हुए तो क्या...

इन असफलताओं के बावजूद भी,

सर्वोच्च होने का इरादा होता है।

और उनके पास ,

जीतने का तरीका ज्यादा होता है।

समय सदुपयोग के गरीब नहीं होते।

मेहनती कभी बदनसीब नहीं होते.......

जो गया जाने दें,

वे इमानदार होते है,

घर चोरी क्षतिपूर्ति के लिए,

किस्मत और भावनाओं के,

मुरीद नहीं होते...

मेहनती कभी बदनसीब नहीं होते,

असफल हुए तो क्या...

अच्छे सोच के साथ मेहनत,

बुराईयों के लिए समय नहीं होता।

अच्छे कर्म और धर्म के लिए,

उन्हें दुनिया से भी भय नहीं होता।

उन्हें दुःख हो ऐसी

ऐसे तरकीब नहीं होते।

मेहनती कभी बदनसीब नहीं होते,

असफल हुए तो क्या...

उत्कृष्ट

होते है, मेहनत से आचरण।

तनम न धन

होते है सम्पूर्ण जीवन।

उन्हें लक्ष्य से विमुख करें

ऐसे तर्क बाजीब नहीं होते,

मेहनती कभी बदनसीब नहीं होते,

असफल हुए तो क्या...

उनके जीवन की सार्थकता,

सदैव तय होती है।

राह एक राह के धावक,

सदैव तन्मय होती है।

कभी गलत सोचों के करीब नहीं होते।






मेहनत करने वाला कभी गरीब नहीं होता... जो गरीब होता है वह बदनसीब नहीं होता










मेहनती कभी बदनसीब नहीं होते,

असफल हुए तो क्या...

बड़े लक्ष्य के लिए कभी,

छोटे छूट सकते है

अच्छे कर्मों के साथ कभी,

बुरे टूट सकते हैं।

पर उद्देश्‍य सार्थक होकर, बेतरकीब नहीं होते।

मेहनती कभी बदनसीब नहीं होते,

असफल हुए तो क्या...

हे भगवान ,

ऐसी बने महता।

दुनिया जीत ले,

ऐसी अनंत क्षमता,

दुनिया के हर समस्या का

सरस तरकीब नहीं होते।

मेहनती कभी बदनसीब नहीं होते,

असफल हुए तो क्या...

Thursday, 23 April 2020

आजकल आपने कही ये शब्‍द जरूर सुना होगा कि मैं समय हुं उसकी इस आवाज मे इतनी खनक क्यो होती है जानते है क्‍योंकिे वह जानता है कि उसका आप कुछ नही बिगाड सकते लेकिन यदि आप उसका अनादर करते रहेंगे तो वह आपका आप से सबकुछ छीन सकता है। इसलिए समय की कीमत को पहचान कर आप अपने सामर्थ्‍य को बनाये जिससे कि आपकी पहचान समाज मे बहुत अच्‍छी हो सके । वर्तमान समय मे समाज को सामर्थ्‍यावान व समझदार लोगो कि बहुत जरूरत है। समय के साथ आपने सामर्थय को पहचानियेे और राष्‍ट्र केा मजबुत किजिए ये हमारा और आपका प्रथम दायित्‍व है जय हिंद जय भारत।।


******************************************************
समय और सामर्थ्य का सामंजस्य....
रोजमर्रा की जीवन और जीने के औचित्य
बनाता हूॅं
मैं समय और सामर्थ्य का सामंजस्य....
हर कदम जीत के लिए हम,
साधनों के लिए साध्य का अहम्।
हर पल हल क्षण के लिए,
लक्ष्य की कसम लगाये जब हर दम।
मैं मेहनत और साहस का भृत्य।
बनाता हूॅं
मैं समय और सामर्थ्य का सामंजस्य....
लक्ष्य सोच विश्‍वास कि पंचाट,
हर बात, हर अवरोध के काट,
लक्ष्य के लिए जीवन हर क्षण,
लक्ष्य कें लिए बना मैं विराट।
मेरे द्वारा किए गए अद्वितीय कृत्य।
बनाता हूॅं
मैं समय और सामर्थ्य का सामंजस्य....
चलने के तरीके खोज, राह निर्माता।
दान धर्मरक्षी, सबसे बड़ा दाता।
हर कदम पर छाप छोडते हुए,
बनूॅ मैं कर्मशील जगपोषित विधाता।
करू सोच बनूॅ बुलंद नित्य।
बनाता हूॅं
मैं समय और सामर्थ्य का सामंजस्य....
रोग रोगी हर दवाई तक,
ज्ञान ज्ञानी की हर पढ़ाई तक।
मर्मज्ञता मीमांसा को सम्माहित किए हुए,
सूक्ष्म और सूक्ष्मता के हर गहराई तक।
करू हर अंधेरा हर शाम से आदित्य।
बनाता हूॅं
मैं समय और सामर्थ्य का सामंजस्य....

Tuesday, 21 April 2020

चहुं ओर तुम्हारी जय हो

तुम सभी के मुख के प्रशंसा भरे लय हो।
करो कुछ ऐसा चहुं ओर तुम्हारी जय हो।
तुम दिलो पर राज करते
कार्य वहीं हो, जो तुम्हारी हुकूम हो,
दुनिया में सबसे रईस अमीर,
नेकदिल कर्मनिष्ट बनाने वाले तुम हो,
दुनिया का हर कोई कर्म मेहनत में निर्भय हो।
तुम सभी के मुख के प्रशंसा भरे लय हो।
करो कुछ ऐसा चहुं ओर तुम्हारी जय हो।
इतना कमाओं बेहिसाब हो दौलत,
जिसे दान करे लगाकर पूरी ताकत।
लोगो के लिए कुछ करो,
छाओं उनके दिल में हो तुम्हारी हुकूमत।
उनके पुत्र, पोषित, इसी काम के लिए तय हो।
तुम सभी के मुख के प्रशंसा भरे लय हो।
करो कुछ ऐसा चहुं ओर तुम्हारी जय हो।
तुम्हें दुनिया में कितने जानते हैं।
कितने लोग तुम्हें पहचानते हैं।
यूॅं गुमनाम जिंदगी नहीं चाहिए।
कितने है जो दुनिया में तुम्हे मानते हैं।
क्यू खुद के नाम पर मात्र संख्या हो।
तुम सभी के मुख के प्रशंसा भरे लय हो।
करो कुछ ऐसा चहुं ओर तुम्हारी जय हो।
सबसे महंगी जीवन-शैली जीने के ढ़ग।
विलाशता से ही भरे हर रंग।
अपनी कर्मों से मेहनत से सोंचो से।
सुख और सफलता की भरी तरंग।
तुम अद्भुत कर्म से शील और विनय हो।
तुम सभी के मुख के प्रशंसा भरे लय हो।
करो कुछ ऐसा चहुं ओर तुम्हारी जय हो।
तुम खाली हाथ आये थे,
पर दुनिया को भर के जाना है।
सुख-दुख के निष्कर्म कर्म में ,
दुनिया कि हर बुराई मिटाना है।
चाहत सोचों से,
युगपुरूष तुम्हारा ही,
स्वर्ग की दिन दिखाना है।
तुम्हारी काया पलट और बदलाव का,
इंतजरा करता जमाना है।
तुम ही दैवीय गुण के संचय हो।
तुम सभी के मुख के प्रशंसा भरे लय हो।
करो कुछ ऐसा चहुं ओर तुम्हारी जय हो।
नाउम्मीदों के उम्मीद हर पल आयेगी।
हर जड़ता में चेतन सी बल आयेगी।
तुम्हारे द्वारा फैलाये सुख के कदमों के साथ,
दुनिया यह दुनिया अवश्‍य चल आएगी।
तुम एक बार मेहनत की जादूई छड़ी घूमा कर तो देखों।
पल भर में यह दुनिया बदल जायेगी।
तुम सभी के मुख के प्रशंसा भरे लय हो।
करो कुछ ऐसा चहुं ओर तुम्हारी जय हो।

Monday, 20 April 2020

हम जरूर जीतेंगे

हम जरूर जीतेंगे

हम जरूर जीतेंगे

यह महामारी की लड़ाई ।

भारत सफलता की संहिता है।

हर शताब्दी जो बीता है।

प्लेग, हैजा, फ्लू और कोरोना

हम जरूर जीतेंगे हमने जीता है।

हम जगाएंगे अपने हटिमताई

हम जरूर जीतेंगे

हम जरूर जीतेंगे

यह महामारी की लड़ाई ।

हम साथ है प्रशासन के

सामाजिक अलगाव पन के

स्वच्छता, मास्क और सेनेटाइजर के

पुलिस प्रहरी और सेना गण के

सभी समाजसेवी  और स्वस्थकर्मीयों की भलाई

हम जरूर जीतेंगे

हम जरूर जीतेंगे

यह महामारी की लड़ाई ।

लोगो के समझ और जो कृते है ।

धैर्यपूर्वक लॉकडाउन जो बीते है।

अग्रसोची पूर्व उपचारात्मकता से

मृत से तीन गुने अधिक महामारी से जीते है।

विश्व को सिखाती अपने देश की कार्यवाही

हम जरूर जीतेंगे

हम जरूर जीतेंगे

यह महामारी की लड़ाई ।

आओ चलो करे आह्वान।

और नहीं फैले, हों सावधान।

रहें अलग, करें सहयोग।

डॉक्टर, पुलिस के प्रति हो सम्मान

बचाव ही है एकमात्र इसका दवाई

हम जरूर जीतेंगे

हम जरूर जीतेंगे

यह महामारी की लड़ाई।

Saturday, 18 April 2020

जिनके लिए तुम आये हो

मित्रो यह कविता विश्‍व की अमुर्त धरोहर भागवत गिता से लिया गया है यह काव्‍यांश हमे  कुछ बेहतर करने की प्रेरणा देती है,मुझे मालुम है जब आप इसे पढेंगे तो जरूर इससे प्रेरित हेांगे तब आपकी सोच कुछ करने के लिए उतावली होंगी जिसे कुछ न कुछ जरूर आपकी जिवन मे परिवर्तन आयेगा। और आपका छोटा सा परिवर्तन इस राष्‍ट्र को गरिमामय बना सकता है।मै पाठकगण से अनुरोध करूंगा की आप अपने बच्‍चों को पढ कर सुनाये जिससे उनमे भारतीय संसकृति का विकास होगा।
***************************************************************************

हर क्षण उनके बारे में सोचो
जिनके लिए तुम आये हो...
अतृप्त इच्छायें जो धन से लाचार हैं,
दुःख रोगी जो निर्धनता के शिकार है।
खुद को संकोचते, मन को जो मारते,
उन्हे भी तो हर सुख-शांति पाने का अधिकार है।
तुमने जिनके उद्धरण की कसमें खाये है।
हर क्षण उनके बारे में सोचो
जिनके लिए तुम आये हो...
बीमारियों से अछूतापन मे भय से,
लोगों की गालियों और जुड़ी मैं से,
उच्च-नीच जाति-पाति जो सहते,
जीते जो उपेक्षित, छोटेपन की संचय से।
जिनसे उत्पन्न जिन्के तुम साये हो।
हर क्षण उनके बारे में सोचो
जिनके लिए तुम आये हो...
काले अपोशित तन, मुह पर मिट्टी डाले है।
एकाद बार भोजन, अन्यथा उन्हें प्रकृति ने पाले है।
जिनके शौक तो कभी बने ही नहीं, उनके जरूरते,
आधे कपड़े पहने हो तो खाने के भी लाले है।
कुछ तो दूर करों जिनकी दुःख अधिकाय है।
हर क्षण उनके बारे में सोचो
जिनके लिए तुम आये हो...
रामूकाका, बुढ़िया, लाचारी, की ताने कस गए।
जब चाहे तब उन पर हस गए
खुद नहीं मरते, आत्म सम्मान रोज मरते हैं।
इतने पर भी इच्छाओं से जिंदगी तरस गए।
जिनकी कुछ तो कुछ उम्मीद बसाए हो।
हर क्षण उनके बारे में सोचो
जिनके लिए तुम आये हो...
भूख और यातनायें जिन्हें रोश भरती है।
मालिक की मार गालियॉं जोश भरती है।
चाहे आराम नहीं, मशीन से सस्ते,
जिन्हें सिर्फ चंद पल की नींदे ही मदहोश करती है।
जिनके लिए ऑखों में तुमने अच्छी जिंदगी सजाये हों।
हर क्षण उन्के बारे में सोचो
जिनके लिए तुम आये हो...
एक बार का खाना ही सुख लगती है।
यातनाये और गालियां भले ही दुःख लगती है।
घिसटते-घिसटते सड़क पर तम्मनायें भले न पूरी हो।
अपाहिज है बचपन से पर भूख तो लगती है।
जिनके तुम ही तुम ही सहाय हो ।
हर क्षण उनके बारे में सोचो
जिनके लिए तुम आये हो...
जिन्होंने मौसम से लडा उसकी परवाह नहीं की।
जिन्होंने परिस्थितियों को जीता उनकी पनाह नहीं ली।
भले ही सड़क में घिसटते हुए जीने की चाहत में,
मेहनत कर रहे हैं, पर खुशी की चाह नहीं की।
जिनकी हर खुशी की बीड़ा तुम उठाये हो।
हर क्षण उनके बारे में सोचो
जिनके लिए तुम आये हो...
जन्म से शोषित कोई सत्कार नहीं,
कर्म से कूली कोई त्योहार नहीं।
काम कोई आराम नहीं, वाह! जिंदगी,
हो जिंदगी से नफरत, जिंदगी से प्यार नहीं।
करो कुछ करो, जो जिंदगी से सताये हो।
हर क्षण उनके बारे में सोचो
जिनके लिए तुम आये हो...

Thursday, 16 April 2020

जरूरत है जुनून की...

अभी नहीं तो कभी नही....
जरूरत है जुनून की...
लक्ष्य के लिए मन में,
ज्वाला और रगो में उबलते खून की।
अभी नहीं तो कभी नही....
जरूरत है जुनून की...
समय अनुशासित संचयी जीत,
दृढ़-निश्‍चय से कर्म नियमित।
शपथपूर्वक कर्म रथ पर लक्ष्य,
निभाने की तलब दण्ड सहित।
और लगातार मेहनत की धून।
अभी नहीं तो कभी नही....
जरूरत है जुनून की...
विषयों के ज्ञान और ज्ञानविद् की,
सदैव और ज्ञान और ज्ञान की मुरीद की।
रोज के स्वप्रेरण से मेहनत से,
सर्वोत्तम आदर्श बनने की जिद्द की।
खोज करने की, पाने की,
जिंदगी की वो सुकून की।
अभी नहीं तो कभी नही....
जरूरत है जुनून की...

मैं महामानव हूॅं

मैं ही हर असंभव के लिए बना संभव हूॅं।

मैं...

मैं असीम शक्तियों से भरा महामानव हूॅं।

मुझमें क्षमता है, दुनिया जीतने की,

हर लक्ष्य साधने की, मेहनत करने की,

आलस्यरहीत समय जीतने की।

मुझमें क्षमता है, सफलता सिंचने की।

असीमित कर्मों से बना मैं अभिनव हूॅं।

मैं असीम क्षमताओं से.........

मैं पर्याय बनूॅं, दृढ़-संकल्प आत्मविश्‍वास की,

निरंतर, अथक प्रयत्न, हिसाब हर श्वास की,

असंभव सी सफलता और हर मंजिल की तलाश की,

मैं पर्याय बनूॅं, हर आस की, हर काश की।

मैं वो जुनून, वो जोश भरा अर्नव हूॅं।

मैं असीम क्षमताओं से.........

मैं ही निरा निर्भय अकेला हिम्मत हूॅं

श्रम, संयम,साहस से भरा दौलत हूॅं।

इंद्रियों का साधक श्रेष्ठ शिरोबिन्दू,

मैं ही वर्तमान, भूत और भविष्य की किस्मत हूॅं।

मैं मेेहनत की आग कभी ना बूझने वाली लौ हूॅं।

मैं असीम क्षमताओं से.........

मैं ही उद्वेग, उन्मेग, अमोघ विलक्षण।

लक्ष्य केन्द्रित लक्ष्य ही लक्ष्य का मन।

लगातार और ज्यादा और ज्यादा संचयन।

तनम न धन हर क्षण करता प्रोत्सोहन,

नव नूतन से नश-नश में भरा अनुभव हूॅं।

मैं असीम क्षमताओं से.........


Tuesday, 14 April 2020

मां मैने तेरी मुस्‍कान नही देखा मां.............

मॉ............
मैंने मुस्कान नहीं देखे...
दुःख से पता नहीं कैसा रिस्ता था ।1।
कोई अरमान नहीं देखे....
मैंने मुस्कान नहीं देखे...
काम तो जैसे खत्म नहीं होते थें।2।
सेवा तो जैसे किस्मत था
आराम तो कभी था ही नहीें,
कुछ कर्मों को ही समझा जन्नत था। 3।
दुःखी देखा ऑसू देखा,
पर फरमान नहीं देखे...
मैंने मुस्कान नहीं देखे...
मेरे बाल्यवस्त्र धोये ऑचल में सुलाया।4।

:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::


अपनी दूध भी पिलाई,

बिना रिस्ते, फिर भी किया सेवा,

बीमार से मरते में जिलाई। 1।

इतना किया फिर भी,

गुस्सा और अभिमान नहीं देखे...

मैंने मुस्कान नहीं देखे...

चलना सिखया, खाना सिखाया,

मेरे गुस्से पर वे मनाते। 2।

मेरी शरारतों को देखा तथा सराहा।

जब मैंने उन्हें दात काटे।

अति परेषान करने पर भी,

डॉट की जुबान नहीं देखे...

मैंने मुस्कान नहीं देखे...

                                             कवि द्वारा मां व पुत्र का वात्‍सलय स्‍नेह का प्रेम पुर्वक वर्णन किया गया है
                                            आपके प्‍यारे कवि--------------------अमित जी***********************

Monday, 13 April 2020

कैसे मैं...............


कैसे मैं......

करोड़ो के लाखों अरमानों को बेकार कर दूॅं

जब तक न भर दूॅं मैं हर बेचैन में राहत

हर गरीब दुखिया हर मरतों में जीवन की चाहत

हर मानव की मासूम फूल जैसे चेहरों में

जब तक न भर दूॅं मैं मुस्कुराहट

जब तक ना मैं हर आॅखों में खुषी का संसार भर दूॅं

-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

कैसे मैं.........

जिन्होंने ने गटर में पड़ें पड़े कीड़ों की जिंदगी जीयें

जिन्होंने ने पैसों के किस्मत से लड़ते हुए हर कर्म किए

जो आये दुसरों के लिए पर उन्के हो न सकें

पैसों की खातीर जी न सकें और अपने दम तोड़ दियें

जब तक न मैं उनके हर सपने साकार कर दूॅ

********************************************************************************************

कैसे मैं.........

जब तक न मैं

जब तक न भर दूॅं तृप्तियों से हर याचक

हर अभावग्रस्त लाचार हर दुख का वाहक

हर बेचारे की बदनसीबी बीमारी बेबसी

जब तक न दूर करू यह जन्म न हो सार्थक

जब तक न मैं हर किसी को खुषी का त्योहार दे दूॅं

कैसे मैं.........

++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++

आभावों मे जुझता परिवार


्््््््््््््््््््््््््््््््््््््

अभावों से जुझता परिवार

दुख से भरा घरबार

न अन्न गृहित माॅं

उस पर षिषु का त्योहार ।

फूल पर कंटिला बिस्तर

खाली पेट का संसार

पडोसी कभी अपनी दूध पिलाती

गृहित पड़ोसी का प्यार ।।

आरोप प्रत्यारोप का दौर

और लड़ाई कलह का द्वार

कुपित जननी गुस्से से

उठाया जब तलवार ।।। 1 ।।।

 

////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////

अभावो से ......

थोड़े चने चबैने के कारण

चर्मकार से टकरार ।

भीक्षुक थें या थे ही

ऐसी बातों की सरोकार ।।

हीन नजरिया नीच सोच

किए सब मानवता का व्यापार ।।।

यह चोर दुनिया ने हमेषा

पहनाया बदनामी का हार

हम ना गम भरी जीवन

सम ना सम सी सार   ।।।।

 

--------------------------------------------------------------------------------

अभावों....................

किसी कि बची भोजन

और पहनावा बना उतार ।

प्रार्थी और याचक बने

गरीबी का गुहार ।।2।।

याचित वस्त्र याचित जूते

फिर चिढाती दुनियादार ।।।3।।।।

लोगो ने लतीफे कसी गुदड़ी के लाल

वह सच ही साकार *

क्यों डूबा मस्ती में

क्यों बन गया बेकार।।।।।

 

******************************************************************

अभावों....................

मौके मिले मेहनत कर

किस्मत नहीं खटखटाती सबकी द्वार

असफलता ही असफलता लाये

एक दो नहीं हजार

जब नाम ना जिंदा कर सके

तो मर ही जाना यार

व्यर्थ सोना बेकार लालच

कमर कस हो तैयार

क्या सोना क्या भोगना

मेहनत करना हद पार

:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::

 अभावों..........

याद कर सौगंध को

अभाव ग्रस्तो को भी दे घरबार

जीवन की जंग में हाथ में तलवार

जिस पर मेहनत मेहनत मेहनत की धार

स्वयं ही राह का निर्माता

स्वयं ही किस्मत की विधाता

मेहनत की ही जीता संसार

अभावों..................

*****************************************************************************