Thursday, 16 April 2020

मैं महामानव हूॅं

मैं ही हर असंभव के लिए बना संभव हूॅं।

मैं...

मैं असीम शक्तियों से भरा महामानव हूॅं।

मुझमें क्षमता है, दुनिया जीतने की,

हर लक्ष्य साधने की, मेहनत करने की,

आलस्यरहीत समय जीतने की।

मुझमें क्षमता है, सफलता सिंचने की।

असीमित कर्मों से बना मैं अभिनव हूॅं।

मैं असीम क्षमताओं से.........

मैं पर्याय बनूॅं, दृढ़-संकल्प आत्मविश्‍वास की,

निरंतर, अथक प्रयत्न, हिसाब हर श्वास की,

असंभव सी सफलता और हर मंजिल की तलाश की,

मैं पर्याय बनूॅं, हर आस की, हर काश की।

मैं वो जुनून, वो जोश भरा अर्नव हूॅं।

मैं असीम क्षमताओं से.........

मैं ही निरा निर्भय अकेला हिम्मत हूॅं

श्रम, संयम,साहस से भरा दौलत हूॅं।

इंद्रियों का साधक श्रेष्ठ शिरोबिन्दू,

मैं ही वर्तमान, भूत और भविष्य की किस्मत हूॅं।

मैं मेेहनत की आग कभी ना बूझने वाली लौ हूॅं।

मैं असीम क्षमताओं से.........

मैं ही उद्वेग, उन्मेग, अमोघ विलक्षण।

लक्ष्य केन्द्रित लक्ष्य ही लक्ष्य का मन।

लगातार और ज्यादा और ज्यादा संचयन।

तनम न धन हर क्षण करता प्रोत्सोहन,

नव नूतन से नश-नश में भरा अनुभव हूॅं।

मैं असीम क्षमताओं से.........


26 comments:

  1. बहुत सुंदर, बहुत शानदार सर.. 🙌🏼🙌🏼

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  2. Bahut hi shandaar jaandaar ..keep it up

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  3. Bahut hi prernadayak kavita

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  4. 🅑🅐🅗🅤🅣 🅐🅒🅗🅗🅗🅐 🅗 🅢🅘🅡

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    1. Thank you... 💐💐💐💐💐
      Kaise ho naveen

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  5. मुझे आपके इस कविता के पंक्तियों में, आपके व्यक्तित्व का पर्याय नज़र आता है । प्राणवान कविता है🙏

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    1. धन्यवाद!अपने बहुत बड़ी बात कही/कहा है अगर मैं ऐसा बनु तो ये मेरा उपलब्धि होगा

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  6. Very motivational poem bro...

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  7. Replies
    1. धन्यवाद। इस प्रेरणा के लिए।

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  8. सहृदय धन्यवाद

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