Saturday, 30 May 2020

जब साथ वो है तो, किसी और कि क्या जरूरत।

जब साथ वो है तो, 
किसी और कि क्या जरूरत।
सब का समाधान जब वही है,
तो किसी और की पाने को,
क्यो हो उल्फत ।
जब साथ वो है तो, 
किसी और कि क्या जरूरत।
वो हमारे हर दुख में, उम्मीद,
हर दर्द को सहने में, जिद्द।
जब करता रखवाली वो,
जिसकी है सारी दुनिया मुरीद।
जब देता है वो दुनिया जीत लेने तक की ताकत।
जब साथ वो है तो, 
किसी और कि क्या जरूरत।
हर कठिनाई हर एकांत में वो पास,
हर होनी अनहोनी की कराता एहसास।
हर सफलता में सुख में,
हर प्रयास में है वो विश्‍वास।
जब हम उसके वो हमारी ही मिलकियत।
जब साथ वो है तो, 
किसी और कि क्या जरूरत।
हमारे गालतियों का गवाह,
हमारे आसंकाओं का परवाह।
उसे ज्ञात है सब हमारा,
हमारे अंदर बुराइयों का पनाह।
क्यां बीमार होते बिगाड़ रहे अपना हालत।
जब साथ वो है तो, 
किसी और कि क्या जरूरत।
पायी दुनिया की सफलता,
बतायी सफलता के रास्ता।
उसी के प्रताप जब,
हमारी जीवन हमारी क्षमता।
जब उसी का मुझमें व्याप्त हिम्मत।
जब साथ वो है तो, 
किसी और कि क्या जरूरत।
हमारी उन्नति किसी को भीख के लिए,
हमारी क्षति खुद को सीख के लिए।
हर कहानी का कहानीकार,
प्रारम्भ जैसा भी हो, अच्छे सरीख के लिए।
हर घटनाएॅ जब उसी की है सत्य।
जब साथ वो है तो, 
किसी और कि क्या जरूरत।
चलूॅं उसी कि राह पर,
करू उसी के चाह पर।
वो मेरे लिए मैं उसके लिए,
जब जीउ उसी के पनाह पर।
जब मेरी मेहनत उसी की है मेहनत।
जब साथ वो है तो, 
किसी और कि क्या जरूरत।
उसी के खुशी उसी के सीतम,
हर व्यवहार सरल और अहम।
सृष्टिकर्ता रचनाकार वो,
उसी की यह लोक और हम।
वही मुझमें है वही है अमित।
जब साथ वो है तो, 
किसी और कि क्या जरूरत।

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