हे भगवान मुझे शांति दे।
आज पुरा विश्व विनाश के दरवाजे पे आ खडा है जैैैसा कि आप जानते है आज एक देश दुुुुुसरे से श्रेष्ठता को सिद्ध करने के कारण पुुुुरा विश्व के स्थल केा परमाणु के ढेर पर ला खडा कर दिया। ऐसे मे कोई मुझे बतायेगा कि आज विश्व मे शांति का दायित्व किसके हाथों मे हैैै। तब यह सोचकर कवि जो एक मानव मात्र हैै का ह्रदय फट जाता है और उसे समझ मे कुछ नही आता कि क्या किया जाये तब वह भगवान की शरण मे चला जाता है। भगवान के आगे हाथ फैलाकर उनसे विनती करता है कि हे भगवान मेरा मन मे शांति का संचार कर दे भगवान
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हे भगवान...
मेरी इस तड़प को कम कर मुझे शांति दे...
जो मेरे लायक नहीं...
मन क्यों तड़पे वहीं...
दिल अधीर होकर
क्यों नहीं समझता सही...
हे भगवान मुझे मुक्त कर हर भ्रांति से...
हे भगवान...
मेरी इस तड़प को कम कर मुझे शांति दे...
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यहां कवि अपने मन की ख्वािहिशेेा का त्याग कर देता है वह एक बालक की भांति या यु कहे बुद्ध कि तरह भगवान से ज्ञान मांगने लगता है ।
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मेरे साथ ऐसा क्यों...
मुझे ख्वाहिश नहीं थी वैसी हो...
पर जब खत्म होना चाहिए...
तो क्यों तड़पता है यों...
हे भगवान मन में ज्ञान कि क्रांति दे,
हे भगवान...
मेरी इस तड़प को कम कर मुझे शांति दे...
वह राह दिखा जो...
इनसे सर्वदा मुक्त हो...
मन में द्वेषरहित विचार...
अच्छे सोच मन उन्मुक्त हो...
हे भगवान बचा इस तड़प की आंधी से...
हे भगवान...
मेरी इस तड़प को कम कर मुझे शांति दे...



Awesome lines
ReplyDeleteThank you
DeleteSabdo ka prayog prabhavi hai👌👌
ReplyDeleteThank you
Deleteॐ शांति।
ReplyDeleteअंतःकरण से स्पर्श कर देने वाली कविता।
भाई।
Om Shanti sitesh bhai
DeleteOhm shanti
ReplyDeleteOhm shanti
DeleteGood one sir👏
ReplyDeleteThank you
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ReplyDeleteबधाई बहुत बहुत आपको
Pr kyon?
Deleteमन में द्वेषरहित विचार से शांति प्राप्त होती है , वाह सर जी वाह
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