Wednesday, 20 May 2020

सोचो के हर विषय में

सोचो के हर विषय में,
जब तक लक्ष्य न हो,
शत प्रतिशत लक्ष्य नहीं मिल सकता।
जीवन के हर क्षण पर,
दर्शित हर कण पर।
जब तक न लक्ष्य हो,
दिलो-दिमागों और मन पर।
मेहनत, मेहनत जब छा जाये मैं मे।
सोचो के हर विषय में,
जब तक लक्ष्य न हो,
शत प्रतिशत लक्ष्य नहीं मिल सकता।
हर काश  में हर आश  में,
हर पल की हर तलाश में।
जब तक न लक्ष्य बसे ,
हृदय की हर सांस में।
लक्ष्य की प्यास हो जब हर तन्मय में।
सोचो के हर विषय में,
जब तक लक्ष्य न हो,
शत प्रतिशत लक्ष्य नहीं मिल सकता।
है असीम क्षमताओं से युक्त,
है हर संभव को उपयुक्त।
लक्ष्य के सिवाय हो जब,
हर सोच हर कर्म ये मुक्त।
जब लक्ष्य ही हो हमारी हर निर्णय में।
सोचो के हर विषय में,
जब तक लक्ष्य न हो,
शत प्रतिशत लक्ष्य नहीं मिल सकता।
आप ही भगवान हो, 
आप ही किस्मत तमाम हो।
लक्ष्य लक्ष्य की मूर्त,
आप ही सफलता के पहचान हो।
लक्ष्य के इस सफलता में विजय में।
सोचो के हर विषय में,
जब तक लक्ष्य न हो,
शत प्रतिशत लक्ष्य नहीं मिल सकता।
हर धड़कन में, धड़कता लक्ष्य,
सपनों में सफलता के तथ्य।
जब तक न हो लक्ष्य में आप,
और आप में बसा लक्ष्य।
जब तक न बसे लक्ष्य लक्ष्य हर आशय में 
सोचो के हर विषय में,
जब तक लक्ष्य न हो,
शत प्रतिशत लक्ष्य नहीं मिल सकता।
लक्ष्य का नशा, हर काम में,
सोच में लक्ष्य, हर आराम में।
जब लक्ष्य छा जाये हर क्षण,
लक्ष्य लक्ष्य ही सुबहो-शाम में।
जब दृढ़-संकल्प हो सोचो के हर विषय में।
सोचो के हर विषय में,
जब तक लक्ष्य न हो,
शत प्रतिशत लक्ष्य नहीं मिल सकता।

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